Saturday, November 1, 2008
Wednesday, October 29, 2008
Saturday, October 25, 2008
प्रणाम
मुझे भगवन बुढादेव की कृपा से प्रथम पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई......बुढादेव हमारे समाज का आराध्य देव है.....हमारे सारे संस्कार बुढादेव की कृपा से ही संचालित होते है। जन्म संस्कार, विवाह संस्कार तथा मृत्यु संस्कार में बुढादेव की सबसे पहले आराधना की जाती है। हमारी मान्यता है की बुढादेव अर्थात पूर्वज जो की देव तुल्य होते है ...उनकी कृपा दृष्टि हमारे हर कार्य पर बनी रहे इसलिए हर घर एक मन्दिर की स्थापना की जाती ही।
Friday, October 10, 2008
घोटुल
मैंने इस ब्लॉग का नम घोटुल इसलिए रखा है क्योंकि हमारी आदिवासी कम्युनिटी में घोटुल एक ऐसी संस्था है जहाँ आदिवासी युवक-युवतियां सामाजिक संस्कार सीखता है.....अपनी सम्रिध्शाली और पुरातन संस्कृती से रूबरू होता है। आज आदिवासी संस्कृति दुनिया की सबसे पुराणी संस्कृति के रूप में जनि जाती है। आज इस संस्कृति को सम्मान पूर्वक स्थापित करना हम सभी का कर्तव्य है.....शायद इसी कारन मैंने अपने ब्लॉग का नाम घोटुल रखा है......शायद आप सभी को घोटुल सुनने में अटपटा सा लगे पर घोटुल.........हमारे लिए एक मन्दिर के सामान है जहाँ हमने आदिवासी लोकसंगीत, लोकनृत्य, लोककला तथा ऐसी ही तमाम लोकविधाओं को सीखा जो हमारे लिए एक खास महत्व रखती है......मई एक बार फिर घोटुल जैसी संस्था को प्रणाम करता हूँ जो हमारी पुरातन संस्कृति को आज भी बचाए राखी है.
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