Saturday, November 1, 2008

प्रणाम.....

आज इस ब्लॉग जगत में मै एक बार फिर आपके सामने हाज़िर हूँ......आज मै अपने गांव से ब्लॉग लिख रहा हूँ.....मेरा गांव अम्बागढ़ चोकी जो की एक आदिवासी बाहुल है। यहाँ गोंड जनजाति की तादात सबसे ज्यादा है पर अपसोस गोंडी संस्कृति विलुप्त होती जा रही है...यहाँ पहले कभी गोंडी बोली का अच्छा प्रभाव हुवा करता था पर आज वो भी बिल्कुल नगण्य हो गया है। इसका सबसे बड़ा कारण शहरी संस्कृति है....शहरी संस्कृति कोई बुरी नहीं है पैर मेरी सोंच में शहरी और ग्रामीण संस्कृति में तालमेल बहुत जरुरी है..इसी कारण मेरा प्रयास गोंडी संस्कृति को बचाने का है। गोंडी बोली भाषा के सारे मापदंड पूरे करने के बाद भी भाषा के रूप में मान्यता न मिल पाना वाकई दुर्भग्य पूर्ण है।

एक नई सुबह......


मेरा घर .....मेरा आंगन.


Saturday, October 25, 2008

http://www.ktujm.ac.in

प्रणाम

मुझे भगवन बुढादेव की कृपा से प्रथम पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई......बुढादेव हमारे समाज का आराध्य देव है.....हमारे सारे संस्कार बुढादेव की कृपा से ही संचालित होते है। जन्म संस्कार, विवाह संस्कार तथा मृत्यु संस्कार में बुढादेव की सबसे पहले आराधना की जाती है। हमारी मान्यता है की बुढादेव अर्थात पूर्वज जो की देव तुल्य होते है ...उनकी कृपा दृष्टि हमारे हर कार्य पर बनी रहे इसलिए हर घर एक मन्दिर की स्थापना की जाती ही।