Thursday, July 24, 2014
Wednesday, July 16, 2014
आदिवासी पत्रकारिता
Monday, July 14, 2014
जनजातीय पत्रकारिता इतना उपेक्षित क्यों है ?
Wednesday, July 9, 2014
Thursday, July 3, 2014
Saturday, June 28, 2014
सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता होना जरुरी है।
भारत् में जितने बच्चे स्कूल जातें है, करीब-करीब उतने ही बच्चे स्कूल नहीं जा पातें हैं। इनमे ग्रामीणों की संख्या सबसे ज्यादा है। बच्चों के स्कूल नहीं जा पाने की सबसे बड़ी वजह गरीबी, घर से स्कूल की दुरी, बच्चों की सुरक्षा का अभाव और निजी महंगे स्कूल है।
एक आंकड़े के मुताबिक भारत में 27% पांचवी तक तथा 40.6% आठवीं तक स्कूल छोड़ देते है। जिसमे से 48% बच्चे आर्थिक कारणों व् घरेलु कामों में मदद के लिए स्कूल छोड़ते हैं, 20% बच्चे पढाई रुचिकर नहीं लगती इसलिए छोड़ते हैं, 12% परिवार के पलायन के कारण स्कूल छोड़ते हैं वहीँ 5.3% बच्चे सरकारी स्कूल इसलिए छोड़ते है क्योंकि वहां पढाई अछि नहीं होती। तथा 05% बच्चे दुरी की वजह से स्कूल छोड़ते है।
मानव संसाधन मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार 1.19 करोड़ बच्चे अभी स्कूल से बहार हैं जिसमे से 74.70 लाख बच्चे हर साल बीच में ही स्कूल छोड़ देतें हैं। प्राम्भिक स्कूलों के हाल पर अगर गौर करें तो 43% स्कूल में खेल का मैदान नहीं है, 39% में चारदीवारी ही नहीं है, 31% स्कूलों में बचियों के लिए सौचालय तक नहीं है।
राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण के एक रिपोर्ट के अनुसार देश में तीसरी कक्षा तक के 35 फीसदी बच्चे ठीक से सुनकर उत्तर नहीं दे पाते, 30 फीसदी बच्चे गणित के सवाल हल नहीं कर पाते हैं । वहीँ 14 फीसदी बच्चे ऐसे है जो किसी चित्र को नहीं पहचान पातें हैं। भाषा के मामले में मध्यप्रदेश के छात्रों ने व् केरल और पांडुचेरी की छात्राओ ने अच्छा प्रदर्शन किया। गणित में विशेषकर केरल की छात्राओ का प्रदर्शन बेहतर रहा। इसके बावजूद बच्चे अपनी योग्यता से निजी स्कूल के बच्चों से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। जो की आने आ में एक उपलब्धि है।










