24 जून रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस के रूप में सारे देश में मनाया जाता है। इसी दिन गोंडवाना की रानी दुर्गावती ने रण भूमि में लड़ते लड़ते वीरगति को प्राप्त हुई थी। गोंडवाना राज्य के इतिहास में रानी दुर्गावती का महत्वपूर्ण स्थान है, जिन्होंने गोंडवाना राज्य के विकास के लिये अपना जीवन समर्पित कर दिया।
मध्यप्रदेश के जबलपुर में रानी दुर्गावती के नाम से एक विश्वविद्यालय भी स्थापित है जहाँ पर एक साथ कई विषयों की पढाई कराइ जाती है। मेरे ख्याल से रानी दुर्गावती की कर्मस्थली रही मध्यप्रदेश जैसे राज्य के लिए रानी दुर्गावती को सबसे बड़ी श्रधांजलि है। इसके बाद की बड़ी श्रधांजलि मुझे याद नहीं आती।
मुझे लगता है गढ़ा मंडला जैसे विकसित राज्य जिसे गोंडवाना राज्य के नाम से भी जाना जाता रहा के योगदान को अब तक पर्याप्त सम्मान नहीं मिल पाया है। छात्तिश्गढ़ राज्य में तो अभी तक उनके स्मरण की खबर ध्यान में नहीं आता है जो की इस समाज के अस्मिता को प्रभावित करता है।
इस वर्ष तो मुझे छात्तिश्गढ़ जैसे जनजातीय राज्य में इन आदिवासी अस्मिता के प्रतीको के प्रति शर्धांजलि सभा का आयोजन नहीं किया जाना एक तरह से देश की आजादी में जनजातीय समाज के योगदान को विस्मृत किये जाने जैसा मालूम पड़ता है।
Wednesday, June 25, 2014
रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर शत शत नमन !
Friday, June 20, 2014
कल्पित काया है ।
ये कैसी है अजब सी गाथा,
मुझको जीवन रास न आता।
देश अभी तक है क्यों बौना,
आज मुझे है ये सब कहना।।
पहला दौर अंग्रेजों का आया,
उसने भी हमें बहुत सताया।
फिर आई अंग्रेजियत की बारी,
लूट के ले गई हिंदी सारी।।
लुटिया डूब गई लूट जाने से,
अंग्रेजियत के घर आने से।
अब भड़का है ऐसा शोला,
क्योंकि आया कोका कोला।।
कोला का है ऐसा जादू,
दिल पर नहीं है किसी का काबू।
क्योंकि, माँम डैड का का है ये सवाल,
क्यों न हो अब खुला ख्याल।।
अभी दौर ऐसा आया है,
वेस्टर्न कल्चर का साया है।
इस कल्चर की माया देखो,
पूरा का पूरा कल्पित काया है।
कल्पित काया है।।
Monday, June 16, 2014
चल संवेदना शिविर
संवेदना का तिलक लगाकर
आगे बढ़ते जाना है।
नहीं रुकेगा यह पथ अपना
जीवन ज्योति जगाना है।
मंदर से निकली है ज्योति
जीवन अलख जगाने को
पगडंडी के कांटे कह गए
अब तो मुझे हटाना है।
नहीं रुकेगा.......जीवन ज्योति जगाना है।
धुप घनेरी छाँव घनेरी
रस्ते पर हर गाँव घनेरी
चेतना का संचार करते
पग-पग बढ़ते जाना है।
नहीं रुकेगा.......जीवन ज्योति जगाना है।
राष्ट्र प्रेम का सपना लेकर
निकल पढ़ा है देश हमारा
पथ्रीलें है रस्ते फिर भी
अविरल बहते जाना है।
नहीं रुकेगा .......जीवन ज्योति जगाना है।
संवेदना का तिलक लगाकर, आगे बढ़ते जाना है।
नहीं रुकेगा यह पथ अपना, जीवन ज्योति जगाना है।।
What is going wrong in implementation of ICT related schemes in remote Tribal areas ?
What is going wrong in implementation of ICT related schemes in remote Tribal areas ?
Sunday, June 15, 2014
भारतीय शिक्षा प्रणाली पर विचार आवश्यक है.......!
संयुक्त राष्ट्र संघ की शिक्षा इकाई ने भारतीय शिक्षा बजट को लेकर चिंतित डिकी पढ़ रही है। यूनेस्को की Education for all- Global Monitoring Report 2013-2014 के अनुसार भारत में शिक्षा पर खर्च वर्ष 1999 में सकल घरेलु उत्पाद का 4.4% था, जो वर्ष 2010 में घटकर 3.3% हो गया ।
वर्ष 2011 में भारत में प्रति व्यक्ति शिक्षा पर सरकारी खर्च 409 डॉलर था, जबकि सामान अर्थव्यवस्था वाले ब्राज़ील अपने कुल व्यय का 18% हिस्सा शिक्षा पर खर्च करता है, जबकि भारत में यह 10.5% है।
स्कूल नहीं जाने वाले बच्चो की वैश्विक स्तर पर संख्या वर्ष 1999 में 10.70 करोड़ थी, जो वर्ष 2011 में घटकर 5.7 करोड़ हो गई । इसी समय भारत में स्कूल नहीं जाने वालों की संख्या 61.84 लाख थी जो घटकर 16.74 लाख हो गई फिर भी स्कूल नहीं जाने वाले सर्वाधिक बच्चों की संख्या के मामले में भारत चौथा बड़ा देश है।
अतः इस पर गंभीरता से विचार करके भारतीय शिक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधर हेतु ठोस कदम उठाने होंगे।
Saturday, June 14, 2014
अगले सत्र से आदिवासी शिक्षा विभाग के स्कूल भी स्कूली शिक्षा विभाग से संचालित होंगे ।
सरकार के द्वारा यह निर्णय लिया गया है की आगामी सत्र से आदिवासी विभाग के समस्त स्कूल स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित किये जायेंगे। वर्तमान में आदिवासी विभाग के पास 25,276 संस्थाएं है जिनमे 18,47,165 बच्चे पढ़ रहे हैं व् 1,70,015 स्टाफ कार्यरत हैं। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग में 61,19,071 बच्चे पढ़ रहे हैं तथा 2,31,169 स्टाफ कार्यरत हैं।
सरकार का यह तर्क है कि इस व्यवस्था से पढाई में गुणवत्ता व् समानता आयेगी तथा पूरी शिक्षा व्यवस्था का नियंत्रण एक ही विभाग के पास होगा।
अब देखना है कि इस व्यवस्था से आदिवासी क्षेत्रों की स्कूल समस्या में कितना सुधार हो पायेगा ?