Thursday, January 21, 2021

अबूझमाड़ (नारायणपुर) में क्रांति की मशाल जलाकर देश की आज़ादी की अगुवाई करने वाले बलिदानी माटी के वीर सपूत, परलकोट क्रांति के नायक, अमर शहीद गैंद सिंह नायक की शहादत पर शत् शत् नमन्।।

अबूझमाड़ (नारायणपुर) में क्रांति की मशाल जलाकर देश की आज़ादी की अगुवाई करने वाले बलिदानी माटी के वीर सपूत, परलकोट क्रांति के नायक, अमर शहीद गैंद सिंह नायक  की शहादत पर शत् शत् नमन्।। 

Wednesday, January 20, 2021

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के विज्ञापन एवं जनसंपर्क अध्ययन विभाग द्वारा उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन।

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के विज्ञापन एवं जनसंपर्क अध्ययन विभाग द्वारा आयोजित उन्मुखीकरण कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित आईआईएमसी, नई दिल्ली की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जयश्री जेठवानी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि विज्ञापन व जनसंपर्क के विभिन्न क्षेत्रों में अपने ज्ञान व कौशल के माध्यम से सफलता प्राप्त की जा सकती है ।  विज्ञापन व जनसंपर्क का क्षेत्र बहुत ही व्यापक है जिसकी शुरुआत मनुष्य की सभ्यता की शुरुआत से ही मानी जा सकती है, अलग-अलग राज्य सत्ताओं द्वारा भी विज्ञापन व जनसंपर्क का कैसे सहारा लिया जाता रहा है इसके बारे विस्तार पूर्वक बताया। 
उन्मुखीकरण कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल में जनसंपर्क के महाप्रबंधक   श्री विजय मिश्रा  ने  विज्ञापन के विभिन्न आयामों के बारे में चर्चा करते हुए बताए कि विज्ञापन व जनसंपर्क महीन से महान बनाने की एक कला है। विज्ञापन आप व हम सभी के बीच स्थापित होने की प्रक्रिया का नाम है। विज्ञापन में दी गई जरुरी बातों को जानना हम सभी के लिए लाभकारी है। उन्होंने बाइक का उदाहरण देते हुए विज्ञापन के महत्व पर चर्चा किए तथा विज्ञापनों में भाषा का प्रयोग कैसे महत्वपूर्ण है इसके बारे में भी आपने विस्तार पूर्वक बताया।  उन्होंने कहा कि योजनाओं को दिल और दिमाग में बैठाने के लिए भाषा का सुगम व सरल होना बेहद जरूरी है तथा भारतीय भाषा में छपा विज्ञापन ह्रदय, मन व मस्तिष्क में उतर जाता है। श्री विजय मिश्रा ने भारत में भाषा के महत्व को प्रसिद्ध साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र तथा अकबर इलाहाबादी के कृतियों के माध्यम से समझाने का प्रयास किया। श्री विजय मिश्रा ने छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल द्वारा प्रयोग किए जा रहे बिजली बचाओ अभियान के संदर्भ में कैसे छत्तीसगढ़ी भाषा प्रभावकारी रहा इसके बारे में भी बताया ।  श्री विजय मिश्रा जी ने छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रयोग के बारे में बताते हुए प्रसिद्ध नाटककार हबीब तनवीर के नाटकों का भी उल्लेख  करते हुए यह बताया कि छत्तीसगढ़ी भाषा को गांव से विश्व पटल तक पहुंचाने का कार्य हबीब तनवीर जैसे लोगों के द्वारा किया गया है। उन्होंने कुछ विज्ञापनों के स्लोगन  जैसे -यह दिल मांगे मोर , अमूल पीता है इंडिया ,  के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि कैसे हिंदी और अंग्रेजी के प्रयोग से आम उपभोक्ता को प्रभावित किया जा सकता है।
इस कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल के प्रोफ़ेसर पवित्र श्रीवास्तव ने सरकारी क्षेत्र व कारपोरेट क्षेत्रों में जनसंपर्क के महत्व के बारे में चर्चा करते हुए यह बताया कि सरकारी क्षेत्र व कारपोरेट क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। सरकारी क्षेत्र में राष्ट्रीय व राज्य स्तर के जनसंपर्क संस्थानों में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं।
 प्रो.पवित्र श्रीवास्तव जी ने राष्ट्रीय स्तर के जनसंपर्क संस्थान , प्रदेश सरकार की जनसंपर्क संचालनालय, छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल तथा अन्य सरकारी विभागों में जनसंपर्क की उपयोगिता पर विस्तार पूर्वक चर्चा किया। प्रोफेसर श्रीवास्तव ने कारपोरेट क्षेत्र में भी जनसंपर्क की उपयोगिता पर छात्रों से बातचीत करते हुए यह कहा कि इस क्षेत्र में जनसंपर्क कौशल का बहुत महत्व है वर्तमान समय में जनसंपर्क व विज्ञापन का क्षेत्र विस्तृत होता जा रहा है विज्ञापन एवं जनसंपर्क की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को इन क्षेत्रों में अपार संभावनाएं नजर आती है जनसंपर्क की संभावनाओं के बारे में चर्चा करते हुए प्रोफेसर श्रीवास्तव ने यह बताएं कि  सृजनात्मकता में रुचि रखने वाले तथा जोखिम उठाने वालों के लिए विज्ञापन व जनसंपर्क के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में विज्ञापन व जनसंपर्क के अलावा इवेंट एग्जीबिशन मैनेजर, कारपोरेट कम्युनिकेशन अधिकारी, पब्लिसिटी ऑफिसर,  प्रचार अधिकारी, कॉपीराइटर,  विजुलाइजर तथा आर्ट डायरेक्टर जैसे  रोजगार प्राप्त कर सकते हैं
इस कार्य की अध्यक्षता करते हुए कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि उन्मुखीकरण कार्यक्रम सभी विद्यार्थियों व शिक्षकों के लिए सुयोग्य ज्ञान संपन्न कराने की एक प्रक्रिया है इसके माध्यम से नवप्रवेशी विद्यार्थीयों को विज्ञापन  व जनसंपर्क के व्यावहारिक ज्ञान को समझने में आसानी होती है। प्रोफेसर बलदेव भाई शर्मा ने पत्रकारिता के बारे में बात करते हुए कहा कि पत्रकारिता सिर्फ विषय बस नहीं है पत्रकारिता एक प्रवृत्ति का नाम है जो हमें निरंतर सीखने वह जूझने की कला सिखाती है। पत्रकारिता के विद्वानों ने कहा है कि शिक्षा हमें विवेकशील बनाती है उसी तरह दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने की कला का नाम पत्रकारिता है।  पत्रकार का मूल धर्म जीवन में सफलता पाना ही नहीं होता है बल्कि जीवन में उत्कृष्टता को प्राप्त करना भी आवश्यक होता है। प्रो. बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि इस क्षेत्र में हर विद्यार्थियों को अपने शक्ति समय व ऊर्जा के सदुपयोग करके जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास निरंतर करते रहना चाहिए।  उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम का उदाहरण देते हुए यह बताया कि पत्रकारों की एक पीढ़ी ने किस प्रकार संघर्ष करते हुए भारत को आजादी दिलाई उसी प्रकार अपना जीवन देश समाज की भलाई के लिए न्योछावर करना ही पत्रकारिता का मूल धर्म है। अंत में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ आनंद बहादुर सिंह ने सभी आगंतुक अतिथियों का आभार प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उन्मुखीकरण कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर शैलेंद्र खंडेलवाल, प्रोफेसर पंकज नयन पांडे, डॉक्टर नृपेन्द्र शर्मा, डॉक्टर नरेंद्र त्रिपाठी, डॉ राजेंद्र मोहंती, डॉ ऋषि दुबे व विश्वविद्यालय के सभी प्राध्यापक गण तथा सभी विभागों के विद्यार्थी गण उपस्थित रहे।

National Monitoring Committee


Monday, December 21, 2020

मां पिता पूजनीय हैं।

सर्वतीर्थमयी माता सर्वदेवमय: पिता। 
मातरं पितरं तस्मात् सर्वयत्नेन पूजयेत्।। 

 माता-पिता अपनी संतान के लिए जो क्लेश सहन करते हैं, उसके बदले पुत्र यदि सौ वर्ष माता-पिता की सेवा करे, तब भी वह इनसे उऋण नहीं हो सकता।

Sunday, April 19, 2020

महाभारत

*पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं -*
*1. युधिष्ठिर    2. भीम    3. अर्जुन*
*4. नकुल।      5. सहदेव*

*( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है )*

*यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन*
*की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी ।*

*वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र…..*
*कौरव कहलाए जिनके नाम हैं -*
*1. दुर्योधन      2. दुःशासन   3. दुःसह*
*4. दुःशल        5. जलसंघ    6. सम*
*7. सह            8. विंद         9. अनुविंद*
*10. दुर्धर्ष       11. सुबाहु।   12. दुषप्रधर्षण*
*13. दुर्मर्षण।   14. दुर्मुख     15. दुष्कर्ण*
*16. विकर्ण     17. शल       18. सत्वान*
*19. सुलोचन   20. चित्र       21. उपचित्र*
*22. चित्राक्ष     23. चारुचित्र 24. शरासन*
*25. दुर्मद।       26. दुर्विगाह  27. विवित्सु*
*28. विकटानन्द 29. ऊर्णनाभ 30. सुनाभ*
*31. नन्द।        32. उपनन्द   33. चित्रबाण*
*34. चित्रवर्मा    35. सुवर्मा    36. दुर्विमोचन*
*37. अयोबाहु   38. महाबाहु  39. चित्रांग 40. चित्रकुण्डल41. भीमवेग  42. भीमबल*
*43. बालाकि    44. बलवर्धन 45. उग्रायुध*
*46. सुषेण       47. कुण्डधर  48. महोदर*
*49. चित्रायुध   50. निषंगी     51. पाशी*
*52. वृन्दारक   53. दृढ़वर्मा   54. दृढ़क्षत्र*
*55. सोमकीर्ति  56. अनूदर    57. दढ़संघ 58. जरासंघ   59. सत्यसंघ 60. सद्सुवाक*
*61. उग्रश्रवा   62. उग्रसेन     63. सेनानी*
*64. दुष्पराजय        65. अपराजित*
*66. कुण्डशायी        67. विशालाक्ष*
*68. दुराधर   69. दृढ़हस्त    70. सुहस्त*
*71. वातवेग  72. सुवर्च    73. आदित्यकेतु*
*74. बह्वाशी   75. नागदत्त 76. उग्रशायी*
*77. कवचि    78. क्रथन। 79. कुण्डी*
*80. भीमविक्र 81. धनुर्धर  82. वीरबाहु*
*83. अलोलुप  84. अभय  85. दृढ़कर्मा*
*86. दृढ़रथाश्रय    87. अनाधृष्य*
*88. कुण्डभेदी।     89. विरवि*
*90. चित्रकुण्डल    91. प्रधम*
*92. अमाप्रमाथि    93. दीर्घरोमा*
*94. सुवीर्यवान     95. दीर्घबाहु*
*96. सुजात।         97. कनकध्वज*
*98. कुण्डाशी        99. विरज*
*100. युयुत्सु*

*( इन 100 भाइयों के अलावा कौरवों की एक बहनभी थी… जिसका नाम""दुशाला""था,*
*जिसका विवाह"जयद्रथ"सेहुआ था )*

*"श्री मद्-भगवत गीता"के बारे में-*

*ॐ . किसको किसने सुनाई?*
*उ.- श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई।*

*ॐ . कब सुनाई?*
*उ.- आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई।*

*ॐ. भगवान ने किस दिन गीता सुनाई?*
*उ.- रविवार के दिन।*

*ॐ. कोनसी तिथि को?*
*उ.- एकादशी*

*ॐ. कहा सुनाई?*
*उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में।*

*ॐ. कितनी देर में सुनाई?*
*उ.- लगभग 45 मिनट में*

*ॐ. क्यू सुनाई?*
*उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए।*

*ॐ. कितने अध्याय है?*
*उ.- कुल 18 अध्याय*

*ॐ. कितने श्लोक है?*
*उ.- 700 श्लोक*

*ॐ. गीता में क्या-क्या बताया गया है?*
*उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है।*

*ॐ. गीता को अर्जुन के अलावा*
*और किन किन लोगो ने सुना?*
*उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने*

*ॐ. अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था?*
*उ.- भगवान सूर्यदेव को*

*ॐ. गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है?*
*उ.- उपनिषदों में*

*ॐ. गीता किस महाग्रंथ का भाग है....?*
*उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है।*

*ॐ. गीता का दूसरा नाम क्या है?*
*उ.- गीतोपनिषद*

*ॐ. गीता का सार क्या है?*
*उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना*

*ॐ. गीता में किसने कितने श्लोक कहे है?*
*उ.- श्रीकृष्ण जी ने- 574*
*अर्जुन ने- 85*
*धृतराष्ट्र ने- 1*
*संजय ने- 40.*

*33 करोड नहीँ  33 कोटी देवी देवता हैँ हिँदू*
*धर्म मेँ।*

*कोटि = प्रकार।*
*देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते है,*

*कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता।*

हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं...*

*कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मे :-*

*12 प्रकार हैँ*
*आदित्य , धाता, मित, आर्यमा,*
*शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष,*
*सविता, तवास्था, और विष्णु...!*

*8 प्रकार हे :-*
*वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।*

*11 प्रकार है :-*
*रुद्र: ,हर,बहुरुप, त्रयँबक,*
*अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी,*
*रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।*

*एवँ*
*दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार।*

*कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी*

*अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है*
*तो इस जानकारी को अधिक से अधिक*
*लोगो तक पहुचाएं। ।*

*🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏*

*१ हिन्दु हाेने के नाते जानना ज़रूरी है*

*THIS IS VERY GOOD INFORMATION FOR ALL OF US ... जय श्रीकृष्ण ...*

*अब आपकी बारी है कि इस जानकारी*
*को आगे बढ़ाएँ ......*

*अपनी भारत की संस्कृति*
*को पहचाने.*
*ज्यादा से ज्यादा*
*लोगो तक पहुचाये.*
*खासकर अपने बच्चो को बताए*
*क्योकि ये बात उन्हें कोई नहीं* *बताएगा...*

*📜😇  दो पक्ष-*

*कृष्ण पक्ष ,*
*शुक्ल पक्ष !*

*📜😇  तीन ऋण -*

*देव ऋण ,*
*पितृ ऋण ,*
*ऋषि ऋण !*

*📜😇   चार युग -*

*सतयुग ,*
*त्रेतायुग ,*
*द्वापरयुग ,*
*कलियुग !*

*📜😇  चार धाम -*

*द्वारिका ,*
*बद्रीनाथ ,*
*जगन्नाथ पुरी ,*
*रामेश्वरम धाम !*

*📜😇   चारपीठ -*

*शारदा पीठ ( द्वारिका )*
*ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम )*
*गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) ,*
*शृंगेरीपीठ !*

*📜😇 चार वेद-*

*ऋग्वेद ,*
*अथर्वेद ,*
*यजुर्वेद ,*
*सामवेद !*

*📜😇  चार आश्रम -*

*ब्रह्मचर्य ,*
*गृहस्थ ,*
*वानप्रस्थ ,*
*संन्यास !*

*📜😇 चार अंतःकरण -*

*मन ,*
*बुद्धि ,*
*चित्त ,*
*अहंकार !*

*📜😇  पञ्च गव्य -*

*गाय का घी ,*
*दूध ,*
*दही ,*
*गोमूत्र ,*
*गोबर !*

*📜😇  पञ्च देव -*

*गणेश ,*
*विष्णु ,*
*शिव ,*
*देवी ,*
*सूर्य !*

*📜😇 पंच तत्त्व -*

*पृथ्वी ,*
*जल ,*
*अग्नि ,*
*वायु ,*
*आकाश !*

*📜😇  छह दर्शन -*

*वैशेषिक ,*
*न्याय ,*
*सांख्य ,*
*योग ,*
*पूर्व मिसांसा ,*
*दक्षिण मिसांसा !*

*📜😇  सप्त ऋषि -*

*विश्वामित्र ,*
*जमदाग्नि ,*
*भरद्वाज ,*
*गौतम ,*
*अत्री ,*
*वशिष्ठ और कश्यप!*

*📜😇  सप्त पुरी -*

*अयोध्या पुरी ,*
*मथुरा पुरी ,*
*माया पुरी ( हरिद्वार ) ,*
*काशी ,*
*कांची*
*( शिन कांची - विष्णु कांची ) ,*
*अवंतिका और*
*द्वारिका पुरी !*

*📜😊  आठ योग -*

*यम ,*
*नियम ,*
*आसन ,*
*प्राणायाम ,*
*प्रत्याहार ,*
*धारणा ,*
*ध्यान एवं*
*समाधि !*

*📜😇 आठ लक्ष्मी -*

*आग्घ ,*
*विद्या ,*
*सौभाग्य ,*
*अमृत ,*
*काम ,*
*सत्य ,*
*भोग ,एवं*
*योग लक्ष्मी !*

*📜😇 नव दुर्गा --*

*शैल पुत्री ,*
*ब्रह्मचारिणी ,*
*चंद्रघंटा ,*
*कुष्मांडा ,*
*स्कंदमाता ,*
*कात्यायिनी ,*
*कालरात्रि ,*
*महागौरी एवं*
*सिद्धिदात्री !*

*📜😇   दस दिशाएं -*

*पूर्व ,*
*पश्चिम ,*
*उत्तर ,*
*दक्षिण ,*
*ईशान ,*
*नैऋत्य ,*
*वायव्य ,*
*अग्नि*
*आकाश एवं*
*पाताल !*

*📜😇  मुख्य ११ अवतार -*

*मत्स्य ,*
*कच्छप ,*
*वराह ,*
*नरसिंह ,*
*वामन ,*
*परशुराम ,*
*श्री राम ,*
*कृष्ण ,*
*बलराम ,*
*बुद्ध ,*
*एवं कल्कि !*

*📜😇 बारह मास -*

*चैत्र ,*
*वैशाख ,*
*ज्येष्ठ ,*
*अषाढ ,*
*श्रावण ,*
*भाद्रपद ,*
*अश्विन ,*
*कार्तिक ,*
*मार्गशीर्ष ,*
*पौष ,*
*माघ ,*
*फागुन !*

*📜😇  बारह राशी -*

*मेष ,*
*वृषभ ,*
*मिथुन ,*
*कर्क ,*
*सिंह ,*
*कन्या ,*
*तुला ,*
*वृश्चिक ,*
*धनु ,*
*मकर ,*
*कुंभ ,*
*मीन!*

*📜😇 बारह ज्योतिर्लिंग -*

*सोमनाथ ,*
*मल्लिकार्जुन ,*
*महाकाल ,*
*ओमकारेश्वर ,*
*बैजनाथ ,*
*रामेश्वरम ,*
*विश्वनाथ ,*
*त्र्यंबकेश्वर ,*
*केदारनाथ ,*
*घुष्नेश्वर ,*
*भीमाशंकर ,*
*नागेश्वर !*

*📜😇 पंद्रह तिथियाँ -*

*प्रतिपदा ,*
*द्वितीय ,*
*तृतीय ,*
*चतुर्थी ,*
*पंचमी ,*
*षष्ठी ,*
*सप्तमी ,*
*अष्टमी ,*
*नवमी ,*
*दशमी ,*
*एकादशी ,*
*द्वादशी ,*
*त्रयोदशी ,*
*चतुर्दशी ,*
*पूर्णिमा ,*
*अमावास्या !*

* स्मृतियां -*

*मनु ,*
*विष्णु ,*
*अत्री ,*
*हारीत ,*
*याज्ञवल्क्य ,*
*उशना ,*
*अंगीरा ,*
*यम ,*
*आपस्तम्ब ,*
*सर्वत ,*
*कात्यायन ,*
*ब्रहस्पति ,*
*पराशर ,*
*व्यास ,*
*शांख्य ,*
*लिखित ,*
*दक्ष ,*
*शातातप ,*
वशिष्ठ !*

कचारगढ़ जत्रा

कचारगढ़ जत्रा
काली कंकाली कचारगढ़ वाली माता पहांदी पारी कुपार लिंगो की गुफा एशिया का सबसे महान गुफा कोयली कचारगढ़ जिसकी ऊंचाई 82 मीटर  एवं 92 मीटर लंबाई एवं 21 मीटर चौड़ाई है।। 

सेवा सेवा सेवा जोहार 
भीमाल पेंनता सेवा सेवा
कली कंकाली ता सेवा सेवा
सब ला सेवा जोहर कीयातोरोम।।