Sunday, April 19, 2020

महाभारत

*पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं -*
*1. युधिष्ठिर    2. भीम    3. अर्जुन*
*4. नकुल।      5. सहदेव*

*( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है )*

*यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन*
*की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी ।*

*वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र…..*
*कौरव कहलाए जिनके नाम हैं -*
*1. दुर्योधन      2. दुःशासन   3. दुःसह*
*4. दुःशल        5. जलसंघ    6. सम*
*7. सह            8. विंद         9. अनुविंद*
*10. दुर्धर्ष       11. सुबाहु।   12. दुषप्रधर्षण*
*13. दुर्मर्षण।   14. दुर्मुख     15. दुष्कर्ण*
*16. विकर्ण     17. शल       18. सत्वान*
*19. सुलोचन   20. चित्र       21. उपचित्र*
*22. चित्राक्ष     23. चारुचित्र 24. शरासन*
*25. दुर्मद।       26. दुर्विगाह  27. विवित्सु*
*28. विकटानन्द 29. ऊर्णनाभ 30. सुनाभ*
*31. नन्द।        32. उपनन्द   33. चित्रबाण*
*34. चित्रवर्मा    35. सुवर्मा    36. दुर्विमोचन*
*37. अयोबाहु   38. महाबाहु  39. चित्रांग 40. चित्रकुण्डल41. भीमवेग  42. भीमबल*
*43. बालाकि    44. बलवर्धन 45. उग्रायुध*
*46. सुषेण       47. कुण्डधर  48. महोदर*
*49. चित्रायुध   50. निषंगी     51. पाशी*
*52. वृन्दारक   53. दृढ़वर्मा   54. दृढ़क्षत्र*
*55. सोमकीर्ति  56. अनूदर    57. दढ़संघ 58. जरासंघ   59. सत्यसंघ 60. सद्सुवाक*
*61. उग्रश्रवा   62. उग्रसेन     63. सेनानी*
*64. दुष्पराजय        65. अपराजित*
*66. कुण्डशायी        67. विशालाक्ष*
*68. दुराधर   69. दृढ़हस्त    70. सुहस्त*
*71. वातवेग  72. सुवर्च    73. आदित्यकेतु*
*74. बह्वाशी   75. नागदत्त 76. उग्रशायी*
*77. कवचि    78. क्रथन। 79. कुण्डी*
*80. भीमविक्र 81. धनुर्धर  82. वीरबाहु*
*83. अलोलुप  84. अभय  85. दृढ़कर्मा*
*86. दृढ़रथाश्रय    87. अनाधृष्य*
*88. कुण्डभेदी।     89. विरवि*
*90. चित्रकुण्डल    91. प्रधम*
*92. अमाप्रमाथि    93. दीर्घरोमा*
*94. सुवीर्यवान     95. दीर्घबाहु*
*96. सुजात।         97. कनकध्वज*
*98. कुण्डाशी        99. विरज*
*100. युयुत्सु*

*( इन 100 भाइयों के अलावा कौरवों की एक बहनभी थी… जिसका नाम""दुशाला""था,*
*जिसका विवाह"जयद्रथ"सेहुआ था )*

*"श्री मद्-भगवत गीता"के बारे में-*

*ॐ . किसको किसने सुनाई?*
*उ.- श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई।*

*ॐ . कब सुनाई?*
*उ.- आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई।*

*ॐ. भगवान ने किस दिन गीता सुनाई?*
*उ.- रविवार के दिन।*

*ॐ. कोनसी तिथि को?*
*उ.- एकादशी*

*ॐ. कहा सुनाई?*
*उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में।*

*ॐ. कितनी देर में सुनाई?*
*उ.- लगभग 45 मिनट में*

*ॐ. क्यू सुनाई?*
*उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए।*

*ॐ. कितने अध्याय है?*
*उ.- कुल 18 अध्याय*

*ॐ. कितने श्लोक है?*
*उ.- 700 श्लोक*

*ॐ. गीता में क्या-क्या बताया गया है?*
*उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है।*

*ॐ. गीता को अर्जुन के अलावा*
*और किन किन लोगो ने सुना?*
*उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने*

*ॐ. अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था?*
*उ.- भगवान सूर्यदेव को*

*ॐ. गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है?*
*उ.- उपनिषदों में*

*ॐ. गीता किस महाग्रंथ का भाग है....?*
*उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है।*

*ॐ. गीता का दूसरा नाम क्या है?*
*उ.- गीतोपनिषद*

*ॐ. गीता का सार क्या है?*
*उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना*

*ॐ. गीता में किसने कितने श्लोक कहे है?*
*उ.- श्रीकृष्ण जी ने- 574*
*अर्जुन ने- 85*
*धृतराष्ट्र ने- 1*
*संजय ने- 40.*

*33 करोड नहीँ  33 कोटी देवी देवता हैँ हिँदू*
*धर्म मेँ।*

*कोटि = प्रकार।*
*देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते है,*

*कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता।*

हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं...*

*कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मे :-*

*12 प्रकार हैँ*
*आदित्य , धाता, मित, आर्यमा,*
*शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष,*
*सविता, तवास्था, और विष्णु...!*

*8 प्रकार हे :-*
*वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।*

*11 प्रकार है :-*
*रुद्र: ,हर,बहुरुप, त्रयँबक,*
*अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी,*
*रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।*

*एवँ*
*दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार।*

*कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी*

*अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है*
*तो इस जानकारी को अधिक से अधिक*
*लोगो तक पहुचाएं। ।*

*🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏*

*१ हिन्दु हाेने के नाते जानना ज़रूरी है*

*THIS IS VERY GOOD INFORMATION FOR ALL OF US ... जय श्रीकृष्ण ...*

*अब आपकी बारी है कि इस जानकारी*
*को आगे बढ़ाएँ ......*

*अपनी भारत की संस्कृति*
*को पहचाने.*
*ज्यादा से ज्यादा*
*लोगो तक पहुचाये.*
*खासकर अपने बच्चो को बताए*
*क्योकि ये बात उन्हें कोई नहीं* *बताएगा...*

*📜😇  दो पक्ष-*

*कृष्ण पक्ष ,*
*शुक्ल पक्ष !*

*📜😇  तीन ऋण -*

*देव ऋण ,*
*पितृ ऋण ,*
*ऋषि ऋण !*

*📜😇   चार युग -*

*सतयुग ,*
*त्रेतायुग ,*
*द्वापरयुग ,*
*कलियुग !*

*📜😇  चार धाम -*

*द्वारिका ,*
*बद्रीनाथ ,*
*जगन्नाथ पुरी ,*
*रामेश्वरम धाम !*

*📜😇   चारपीठ -*

*शारदा पीठ ( द्वारिका )*
*ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम )*
*गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) ,*
*शृंगेरीपीठ !*

*📜😇 चार वेद-*

*ऋग्वेद ,*
*अथर्वेद ,*
*यजुर्वेद ,*
*सामवेद !*

*📜😇  चार आश्रम -*

*ब्रह्मचर्य ,*
*गृहस्थ ,*
*वानप्रस्थ ,*
*संन्यास !*

*📜😇 चार अंतःकरण -*

*मन ,*
*बुद्धि ,*
*चित्त ,*
*अहंकार !*

*📜😇  पञ्च गव्य -*

*गाय का घी ,*
*दूध ,*
*दही ,*
*गोमूत्र ,*
*गोबर !*

*📜😇  पञ्च देव -*

*गणेश ,*
*विष्णु ,*
*शिव ,*
*देवी ,*
*सूर्य !*

*📜😇 पंच तत्त्व -*

*पृथ्वी ,*
*जल ,*
*अग्नि ,*
*वायु ,*
*आकाश !*

*📜😇  छह दर्शन -*

*वैशेषिक ,*
*न्याय ,*
*सांख्य ,*
*योग ,*
*पूर्व मिसांसा ,*
*दक्षिण मिसांसा !*

*📜😇  सप्त ऋषि -*

*विश्वामित्र ,*
*जमदाग्नि ,*
*भरद्वाज ,*
*गौतम ,*
*अत्री ,*
*वशिष्ठ और कश्यप!*

*📜😇  सप्त पुरी -*

*अयोध्या पुरी ,*
*मथुरा पुरी ,*
*माया पुरी ( हरिद्वार ) ,*
*काशी ,*
*कांची*
*( शिन कांची - विष्णु कांची ) ,*
*अवंतिका और*
*द्वारिका पुरी !*

*📜😊  आठ योग -*

*यम ,*
*नियम ,*
*आसन ,*
*प्राणायाम ,*
*प्रत्याहार ,*
*धारणा ,*
*ध्यान एवं*
*समाधि !*

*📜😇 आठ लक्ष्मी -*

*आग्घ ,*
*विद्या ,*
*सौभाग्य ,*
*अमृत ,*
*काम ,*
*सत्य ,*
*भोग ,एवं*
*योग लक्ष्मी !*

*📜😇 नव दुर्गा --*

*शैल पुत्री ,*
*ब्रह्मचारिणी ,*
*चंद्रघंटा ,*
*कुष्मांडा ,*
*स्कंदमाता ,*
*कात्यायिनी ,*
*कालरात्रि ,*
*महागौरी एवं*
*सिद्धिदात्री !*

*📜😇   दस दिशाएं -*

*पूर्व ,*
*पश्चिम ,*
*उत्तर ,*
*दक्षिण ,*
*ईशान ,*
*नैऋत्य ,*
*वायव्य ,*
*अग्नि*
*आकाश एवं*
*पाताल !*

*📜😇  मुख्य ११ अवतार -*

*मत्स्य ,*
*कच्छप ,*
*वराह ,*
*नरसिंह ,*
*वामन ,*
*परशुराम ,*
*श्री राम ,*
*कृष्ण ,*
*बलराम ,*
*बुद्ध ,*
*एवं कल्कि !*

*📜😇 बारह मास -*

*चैत्र ,*
*वैशाख ,*
*ज्येष्ठ ,*
*अषाढ ,*
*श्रावण ,*
*भाद्रपद ,*
*अश्विन ,*
*कार्तिक ,*
*मार्गशीर्ष ,*
*पौष ,*
*माघ ,*
*फागुन !*

*📜😇  बारह राशी -*

*मेष ,*
*वृषभ ,*
*मिथुन ,*
*कर्क ,*
*सिंह ,*
*कन्या ,*
*तुला ,*
*वृश्चिक ,*
*धनु ,*
*मकर ,*
*कुंभ ,*
*मीन!*

*📜😇 बारह ज्योतिर्लिंग -*

*सोमनाथ ,*
*मल्लिकार्जुन ,*
*महाकाल ,*
*ओमकारेश्वर ,*
*बैजनाथ ,*
*रामेश्वरम ,*
*विश्वनाथ ,*
*त्र्यंबकेश्वर ,*
*केदारनाथ ,*
*घुष्नेश्वर ,*
*भीमाशंकर ,*
*नागेश्वर !*

*📜😇 पंद्रह तिथियाँ -*

*प्रतिपदा ,*
*द्वितीय ,*
*तृतीय ,*
*चतुर्थी ,*
*पंचमी ,*
*षष्ठी ,*
*सप्तमी ,*
*अष्टमी ,*
*नवमी ,*
*दशमी ,*
*एकादशी ,*
*द्वादशी ,*
*त्रयोदशी ,*
*चतुर्दशी ,*
*पूर्णिमा ,*
*अमावास्या !*

* स्मृतियां -*

*मनु ,*
*विष्णु ,*
*अत्री ,*
*हारीत ,*
*याज्ञवल्क्य ,*
*उशना ,*
*अंगीरा ,*
*यम ,*
*आपस्तम्ब ,*
*सर्वत ,*
*कात्यायन ,*
*ब्रहस्पति ,*
*पराशर ,*
*व्यास ,*
*शांख्य ,*
*लिखित ,*
*दक्ष ,*
*शातातप ,*
वशिष्ठ !*

कचारगढ़ जत्रा

कचारगढ़ जत्रा
काली कंकाली कचारगढ़ वाली माता पहांदी पारी कुपार लिंगो की गुफा एशिया का सबसे महान गुफा कोयली कचारगढ़ जिसकी ऊंचाई 82 मीटर  एवं 92 मीटर लंबाई एवं 21 मीटर चौड़ाई है।। 

सेवा सेवा सेवा जोहार 
भीमाल पेंनता सेवा सेवा
कली कंकाली ता सेवा सेवा
सब ला सेवा जोहर कीयातोरोम।।

Saturday, April 18, 2020

Ramaswamy Temple

Ramaswamy Temple was built by King Achutha Nayaka who ruled Tanjore from 1614-1640 CE. He was an ardent devotee of Sri Rama.The temple was built in Dravidian architectural style.
           This temple, known as the southern Ayodhya, is unique as Rama and Sita are in a Pattabishekam posture-Coronation scene. Lakshmana stands next to Rama, holding a bow and arrows,they are flanked by Bharatha holding an Umbrella and Shatrughna holding a fan.
         This is the only temple where we can see idols of Rama, Sita and Lakshmana along with Bharatha and Shatrughna. Hanuman is depicted as singing in praise of the god with the help of a veena.

Monday, January 27, 2020

खत्‍म हुआ अलग बोडोलैंड राज्‍य व‍िवाद"

खत्‍म हुआ अलग बोडोलैंड राज्‍य व‍िवाद"

आज भारत सरकार, असम सरकार और बोडो प्रतिनिधियों के बीच 50 वर्ष पुरानी बोडोलैंड समस्या का अंत करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है।

क्या है बोडोलैंड का मुद्दा?

📌 बोडो ब्रह्मपुत्र घाटी के उत्तरी हिस्से में बसी असम की सबसे बड़ी जनजाति है।

📌 1960 के दशक से ही बोडो अपने लिये अलग राज्य की मांग करते आए हैं।

📌 असम में इनकी जमीन पर अन्य समुदायों का आकर बसना और ज़मीन पर बढ़ता दबाव ही बोडो असंतोष की वज़ह है।

📌 अलग राज्य के लिए बोडो आंदोलन 1980 के दशक के बाद हिंसक हो गया और तीन धड़ों में बंट गया।
👉 पहले का नेतृत्व नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड ने किया, जो अपने लिये अलग राज्य चाहता था। 
👉 दूसरा समूह बोडोलैंड टाइगर्स फोर्स है, जिसने अधिक स्वायत्तता की मांग की। 
👉 तीसरा धड़ा ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन है, जिसने मध्यम मार्ग की तलाश करते हुए राजनीतिक समाधान की मांग की।

📌 बोडो अपने क्षेत्र की राजनीति, अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक संसाधन पर जो वर्चस्व चाहते थे, वह उन्हें 2003 में मिला। तब बोडो समूहों ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा की राजनीति में आने पर सहमति जताई।

📌 इसी का नतीजा था कि बोडो समझौते पर 2003 में हस्‍ताक्षर किये गए और भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद का गठन हुआ।

केंद्र सरकार ने असम समझौते पर अमल के अलावा बोडो समुदाय से संबंधित लंबे समय से चले आ रहे मामलों को पूरा करने के विभिन्‍न उपायों को भी मंज़ूरी दी थी।

📌 बोडो समुदाय में व्याप्त असंतोष के मद्देनज़र केंद्र सरकार ने बोडो म्‍यूजियम-सह-भाषा व सांस्‍कृतिक अध्‍ययन केंद्र की स्‍थापना को मंज़ूरी दी है।

📌 कोकराझार में फिलहाल काम कर रहे ऑल इंडिया रेडियो स्‍टेशन व दूरदर्शन केंद्र को आधुनिक बनाया जाएगा।

📌 Bodoland Territorial Area Districts (BTAD) से होकर जाने वाली एक सुपरफास्‍ट ट्रेन का नाम अरोनई एक्‍सप्रेस रखने को भी मंज़ूरी दी है।

बोडोलैंड टेरीटोरियल ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्ट के चार जिलों- कोकराझार, चिरांग, बक्सा और उदालगुड़ी में लगभग 30 फीसदी आबादी बोडो जनजाति की है।

इस समझौते के बाद :

👉 सभी बोडो जनजाति के लोग हिंसा का रास्ता छोड़ेंगे, अपने सभी हथियार सरेंडर करेंगे और अपने सशस्त्र संगठन को एक महीने के भीतर खत्म करेंगे।

👉 एनडीएफबी(पी), एनडीएफबी(आरडी), और एनडीएफबी(एस) के लगभग 1550 कैडरों का भारत सरकार और असम सरकार द्वारा पुनर्वासन किया जाएगा।

👉 बोडो क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को 1500 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

👉 बोडो आंदोलन के समय लगभग 4000 लोगों ने अपनी जान गंवाई, बोडो आंदोलन में जिन परिवार के सदस्यों ने अपनी जान गंवाई उनको 5 लाख का मुवावजा दिया जाएगा।

👉 असम सरकार बोडो भाषा को राज्य में सहयोगी आधिकारिक भाषा का दर्जा भी देगी।

पिछले एक महीने में पूर्वोत्तर समस्या से जुड़े तीन बड़े और ऐतिहासिक समझौते भारत सरकार ने किए हैं. इसमें  त्रिपुरा में 80 सशस्त्र आतंकियों का समर्पण, मिजोरम-त्रिपुरा के बीच ब्रू-रियांग शरणार्थियों को स्थायी निवास देना और अब बोडो शांति समझौता होना शामिल है.

आज एक दशकों पुरानी समस्या का अंत हो गया।

Tuesday, January 14, 2020

आप सभी को मकरसंक्रांति की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।।

मकर संक्रांति - जो 15 जनवरी को पड़ती है - भारतीय संस्कृति में शुभ चरण की शुरुआत का प्रतीक है। यह सूर्य के मकर (मकर) राशि में संक्रमण का प्रतीक है, जो संक्रमण का पवित्र चरण है। यह एक अशुभ चरण के अंत का प्रतीक है, और पवित्र हिंदू अनुष्ठानों को इस दिन से पवित्र किया जा सकता है। यह सूर्य देव का त्योहार है; इस दिन सूर्य अपनी दक्षिणवर्ती यात्रा समाप्त कर लेता है, जो दक्षिणायन है, और पौष के हिंदू महीने में उत्तर की ओर अर्थात उत्तरायण, कर्क रेखा की ओर बढ़ना शुरू होता है (दिसंबर के मध्य से शुरू होता है)। उत्तरायण देवता का दिन है। रात्रि को पाप और असत्य के प्रतीक के रूप में माना जाता है, जबकि दिन को सत्य, सदाचार और धर्म का प्रतीक माना जाता है। इसलिए जब देवताओं के लिए दिन होता है, तो मकर संक्रांति के दिन पुण्य के सभी कार्य किए जाते हैं जब दिन लंबे हो जाते हैं और रातें छोटी हो जाती हैं। हिंदुओं के लिए, सूर्य ज्ञान, आध्यात्मिक प्रकाश और ज्ञान के लिए खड़ा है। मकर संक्रांति इस बात का प्रतीक है कि हमें भ्रम के अंधेरे से दूर रहना चाहिए, जिसमें हम रहते हैं और खुशी से हमारे भीतर रोशनी को चमकने देना शुरू करते हैं। हमें पवित्रता, ज्ञान और ज्ञान में वृद्धि करनी चाहिए, जैसा कि इस दिन से सूर्य करता है। सूर्य सभी आदर्शों के लिए खड़ा है; इसका संदेश प्रकाश, एकता, समानता और सच्ची निस्वार्थता है। ये एक कर्म योगी के आदर्श हैं। अत: सूर्य सबसे बड़े कर्म योगी हैं। क्या यह सभी के लिए कोई पुरस्कार मांगता है जो हमें देता है I यदि यह प्रकाश देना बंद कर देता है, तो हम बर्बाद हो जाएंगे। यदि हम सूर्य से यह एक सीख लेते हैं, तो हमारा जीवन दिव्य चमक के साथ चमक जाएगा।

Saturday, January 11, 2020

Vivekananda Janjati

#भारत में #स्वामी_विवेकानन्द की जयन्ती (१२ जनवरी) को प्रतिवर्ष #राष्ट्रीय_युवा_दिवस के रूप में मनाया जाता है। 'युवा'शब्द से ही उत्साह, स्फूर्ति, सक्रियता आदि गुणों का बोध होता है।'युवा' शब्द वास्तव में आयु- रूप- अर्थ प्रदान करने से परे सकारात्मक गुणों, सक्रिय व्यक्तित्व का बोध अधिक करवाता है। यही व्यक्तित्व बोध समाज, देश व #राष्ट्र के विकास में बड़ी भूमिका निभाता है।
#युवा_दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।।

Tuesday, January 7, 2020

गोंडवाना युथ क्लब एवं आदिवासी धुर्वे गोड़ समाज परिक्षेत्र चारभांठा (कुर्मदा) द्वारा दो दिवसीय सामाजिक उत्थान ,कॅरियर गाइड कार्यशाला आयोजित किया गया।

गोंडवाना युथ क्लब एवं आदिवासी धुर्वे गोड़ समाज परिक्षेत्र चारभांठा (कुर्मदा) में *दो दिवसीय सामाजिक  उत्थान ,कॅरियर गाइड कार्यशाला आयोजित किया गया था...* 
दूसरा दिन बूढ़ादेव के पूजा अर्चना के बाद कार्यशाला का शुरुवात केंद्रीय गोंडवाना धमधागढ़ के *राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री विष्णुदेव ठाकुर जी* ने तीज तिहार रीति-नीति का विस्तार पूर्वक बताया,  *श्री चंद्रेश ठाकुर* ने का समाज मे शिक्षा अतिआवश्यक है, एक रोटी कम खाओ लेकिन समाज बेटी- बेटा को शिक्षित करें समाज आगे आएगा, सहायक प्राध्यापक श्रीमती राजकुमारी धुर्वा मेडम, संतोष कुंजाम, संतराम नेताम, *लोकेश ठाकुर* ने कम्प्यूटर के महत्व एवं रोजगार के अवसर पर शानदार प्रकाश डाला, डॉ आशुतोष मंडावी ने पत्रकारिता में रोजगार के अवसर पर प्रकाश डाला। 
समापन समारोह मुख्य अतिथि ~  *खुज्जी विधान सभा क्षेत्र के विधायक श्रीमती छन्नी साहू* ने गोड़ समाज द्वारा पिछले 5 वर्षो से आदर्श विवाह समाज द्वारा कराया जा रहा है और सामाजिक  कार्यशाला संचालित किया जा रहा उसका उसे समाज एक दिन जरूर आगे आएगा।
       समाज को आगे ले जाने के लिये गोंडवाना यूथ क्लब के अध्यक्ष श्री नीलकंठ कोमरे ने शिक्षा, स्वस्थ, सहयोग की भावना को लेकर गोंडवाना यूथ क्लब गठन किया जो आज उसका परिणाम देखने मिल रहा है।
  कार्यक्रम को सफल मनाने में परिक्षेत्र के मुड़ादार श्री मनराखन नेताम, बसंत मंडावी, सोहन कोमरे, मोहन कोमरे ,देव पन्द्रों, राधा मंडावी, हेमलता पटौती, किरण मांडवी, केदार नेताम, प्रताप पटौती किरण मंडावी, डिम्पल कोमरे, ज्योति मंडावी, मल्लिका पटौती, केवल मंडावी, गजानंद मंडावी, दुर्योधन पन्द्रों, सुंदर मंडावी, ओम प्रकाश कोमरे, चांदनी कोमरे, अनुसुइया कोमरे, रूखमणी सेवता, रामलाल श्याम, गोकुल मंडावी परिक्षेत्र के समस्त सागजन ने योगदान दिया..।