Monday, June 16, 2014
What is going wrong in implementation of ICT related schemes in remote Tribal areas ?
Sunday, June 15, 2014
भारतीय शिक्षा प्रणाली पर विचार आवश्यक है.......!
संयुक्त राष्ट्र संघ की शिक्षा इकाई ने भारतीय शिक्षा बजट को लेकर चिंतित डिकी पढ़ रही है। यूनेस्को की Education for all- Global Monitoring Report 2013-2014 के अनुसार भारत में शिक्षा पर खर्च वर्ष 1999 में सकल घरेलु उत्पाद का 4.4% था, जो वर्ष 2010 में घटकर 3.3% हो गया ।
वर्ष 2011 में भारत में प्रति व्यक्ति शिक्षा पर सरकारी खर्च 409 डॉलर था, जबकि सामान अर्थव्यवस्था वाले ब्राज़ील अपने कुल व्यय का 18% हिस्सा शिक्षा पर खर्च करता है, जबकि भारत में यह 10.5% है।
स्कूल नहीं जाने वाले बच्चो की वैश्विक स्तर पर संख्या वर्ष 1999 में 10.70 करोड़ थी, जो वर्ष 2011 में घटकर 5.7 करोड़ हो गई । इसी समय भारत में स्कूल नहीं जाने वालों की संख्या 61.84 लाख थी जो घटकर 16.74 लाख हो गई फिर भी स्कूल नहीं जाने वाले सर्वाधिक बच्चों की संख्या के मामले में भारत चौथा बड़ा देश है।
अतः इस पर गंभीरता से विचार करके भारतीय शिक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधर हेतु ठोस कदम उठाने होंगे।
Saturday, June 14, 2014
अगले सत्र से आदिवासी शिक्षा विभाग के स्कूल भी स्कूली शिक्षा विभाग से संचालित होंगे ।
सरकार के द्वारा यह निर्णय लिया गया है की आगामी सत्र से आदिवासी विभाग के समस्त स्कूल स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित किये जायेंगे। वर्तमान में आदिवासी विभाग के पास 25,276 संस्थाएं है जिनमे 18,47,165 बच्चे पढ़ रहे हैं व् 1,70,015 स्टाफ कार्यरत हैं। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग में 61,19,071 बच्चे पढ़ रहे हैं तथा 2,31,169 स्टाफ कार्यरत हैं।
सरकार का यह तर्क है कि इस व्यवस्था से पढाई में गुणवत्ता व् समानता आयेगी तथा पूरी शिक्षा व्यवस्था का नियंत्रण एक ही विभाग के पास होगा।
अब देखना है कि इस व्यवस्था से आदिवासी क्षेत्रों की स्कूल समस्या में कितना सुधार हो पायेगा ?
Friday, June 13, 2014
भगवन बिरसा मुंडा जी को शत शत नमन !
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के रायपुर नगर इकाई के द्वारा भगवन बिरसा मुंडा जी को श्रधा सुमन अर्पित की गई , इस अवसर पर उन्हें याद करके उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया।
कबीर जयंती
कबीर दास जी का साहित्य जन साहित्य के रूप में लोकप्रिय है। कबीर दास जी भी एक जननेता थे जो जनता से जुढ़े हुए मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए विख्यात थे तथा उस समय समाज में व्याप्त बुराइयों पर सीधे प्रहार करते दिखलाई पढ़ते हैं ।

